मृग Manik’ बीस दिन-चिह्नों में सातवाँ है, मृत्यु Kimi के बाद: छोड़ने के बाद हाथ ख़ाली हुए, अब काम हो सकता है। इसका चिह्न हिरण नहीं, एक हाथ है — अँगूठा और बाक़ी चार उँगलियाँ मिलकर पकड़ने की मुद्रा। माया में हिरण सबसे अहम शिकार था, और शिकार-देवता का प्रतीक भी; इसलिए Manik’ एक साथ स्थिर हाथ और सटीक शिकार की बात करता है।
इसलिए Manik’ का तंत्र है हाथ की पकड़ और पूर्णता: अभ्यास से, शरीर की याद से, एक-एक चीज़ बनाकर। इसकी ताक़त स्थिरता है — बनी चीज़ टिकती है; कठिनाई धीमापन है — आप तेज़ नहीं चल पाते, दौड़ने वालों से दूरी की होड़ में अक्सर पीछे रहते हैं।
आप इसे कहाँ पहचानेंगे: हाथों से काम करना पसंद, सीखने में धैर्य, “अच्छा बना” का अपना मानदंड, दूसरों का भद्दापन थोड़ा खलना, समय लगना पर बनने के बाद बहुत मज़बूत होना। अनुकूल समय में आप सबसे भरोसेमंद कारीगर हैं: काम पूरा करते हैं, सम्पूर्ण करते हैं, ऐसा बनाते हैं कि कोई छीन न सके। अटके समय में पकड़ बहुत कसी या बहुत धीमी — परफ़ेक्शन के चक्कर में हाथ ही न चलना, या हाथ की आदत के नाम पर नए तरीके ठुकराना। क्रम में Manik’ के बाद तारा Lamat आता है: हाथ से बनी चीज़ अब दिखेगी, लोगों को जुटाएगी। आपका अगला क़दम एक बार और घिसना नहीं, बनी हुई चीज़ को बाहर जाने देना है।