सर्प Chikchan बीस दिन-चिह्नों में पाँचवाँ है, बीज K’an के बाद: बीज मिट्टी में गया, अब शरीर में ऊपर चढ़ती शक्ति। माया का सर्प अदन के बाग़ का साँप नहीं — वह जीवन-शक्ति है (रीढ़, रक्त और बरसात की बिजली के साथ रखा गया), और आकाश का पंखदार सर्प K’uk’ulkan भी, आकाश और धरती के बीच का रास्ता।
इसलिए Chikchan का तंत्र है सहज वृत्ति और जीवन-शक्ति: शरीर पहले जान लेता है, दिमाग़ बाद में पकड़ता है। इसकी ताक़त सीधापन है — कोई घुमाव नहीं, सोच नहीं, बस महसूस हो गया; कठिनाई भी सीधापन है — सहज वृत्ति सटीक होती है पर उसके पास कारण नहीं, उसे सबूत मान लें तो ग़लती होती है।
आप इसे कहाँ पहचानेंगे: तेज़ सहज बोध, शरीर की तेज़ प्रतिक्रिया, लोगों के प्रति बेवजह पसंद-नापसंद जो बाद में अक्सर सही निकलती है, और ऊर्जा में बड़े उतार-चढ़ाव। अनुकूल समय में आप सबसे जीवंत होते हैं: गर्म, सच्चे, आकर्षक, इतनी ऊर्जा कि दूसरों में बाँट भी सकें। अटके समय में सहज वृत्ति आपको बहा ले जाती है — आवेग, एहसास को फ़ैसला मान लेना, या शरीर इतना दब जाए कि परेशानी खड़ी हो। क्रम में Chikchan के बाद मृत्यु Kimi आता है: शक्ति शिखर पर पहुँचकर छोड़ी जाती है। आपका अगला क़दम और ज़ोर लगाना नहीं, यह जानना है कि इस शक्ति को कब गुज़र जाने दें।