यह निष्क्रियता नहीं, ख़ुद को सबसे कम थकाने वाला तरीक़ा है। ज़बरदस्ती शुरुआत अक्सर बेकार मेहनत बनती है।
उत्तर देने की प्रतीक्षा: पहले कुछ आपके पास आए — बात सामने आती है, तभी आपकी ऊर्जा सच में खुलती है।
यह निष्क्रियता नहीं, ख़ुद को सबसे कम थकाने वाला तरीक़ा है। ज़बरदस्ती शुरुआत अक्सर बेकार मेहनत बनती है।
इसे अक्सर “कुछ मत कीजिए, इंतज़ार कीजिए” सुन लिया जाता है। इंतज़ार उस एक प्रतिक्रिया का है, मौक़े के अपने आप पकने का नहीं। दरवाज़ा खुलते ही आप किसी से भी तेज़ चलते हैं।