आपकी परख माहौल के साथ बदलती है। कुछ समय बाद भी जो बना रहे, वह ज़्यादा आपका है।
एक चंद्र-चक्र प्रतीक्षा: बड़े फ़ैसले को एक महीना दीजिए, उसे मन में पूरा चक्कर लगाने दीजिए, फिर तय कीजिए।
आपकी परख माहौल के साथ बदलती है। कुछ समय बाद भी जो बना रहे, वह ज़्यादा आपका है।
इसे अक्सर “बहुत धीमा, मौक़ा छूट जाएगा” कहा जाता है। असल में जो छूटता है, वे वे बातें हैं जिन पर आप ग़लत कमरे में हाँ कह देते। ऐसे मौक़े न लें तो भी चलेगा।