आपके पास कितनी ताक़त है और वह कितनी देर चलेगी, यह यहीं तय होता है — जब आप टिक न पाएँ, तो कारण आलस्य नहीं।
यह केंद्र काम करने के ईंधन का है — काम, प्रजनन-शक्ति, और लगातार करते रह पाने की क्षमता।
आपके पास कितनी ताक़त है और वह कितनी देर चलेगी, यह यहीं तय होता है — जब आप टिक न पाएँ, तो कारण आलस्य नहीं।
अक्सर इसे “शारीरिक दम” समझ लिया जाता है। यह चाहने से जुड़ा है, झेल पाने से नहीं। सही काम में आप दिन भर लगे रहकर भी नहीं थकते, ग़लत काम में टिके रहकर भी सूख जाते हैं — यह इच्छाशक्ति का प्रश्न नहीं।