प्रकार 9 जिससे बचना चाहता है वह है “टकराव, जुड़ाव खोना, कट जाना”, और भरपाई की रणनीति है ख़ुद को समस्या न बनने देना — साथ बहना, मेल बैठाना, अपनी राय को इतना छोटा कर देना कि घर्षण न हो। यह शरीर केंद्र का वह प्रकार है जो क्रोध को सुला देता है: प्रकार 1 का गुस्सा उसूल बनता है, प्रकार 8 का सीधे बाहर आता है, प्रकार 9 का इतना गहरा दब जाता है कि ख़ुद को भी महसूस नहीं होता।
इस क्रिया की सबसे बारीक बात है ख़ुद को भूल जाना: प्रकार 9 दूसरों के एजेंडे में इतनी आसानी से घुल जाता है कि बाद में अपनी चाह भी धुंधली हो जाती है। और वह दबा गुस्सा ग़ायब नहीं होता; वह टालमटोल, निष्क्रियता और एक ख़ास तरह की ज़िद बनता है — प्रकार 9 को आप धकेल नहीं सकते, वह बस हिलता नहीं।
आप इसे कहाँ पहचानेंगे: सब कुछ चलेगा, शायद ही गुस्सा, विरोधी पक्षों को एक साथ समझ लेना, फ़ैसले में बहुत देर, जल्दी करवाने पर और धीमे। सहज समय में प्रकार 9 सबसे सुकून देने वाली उपस्थिति है: समावेशी, स्थिर, सच में सुनने वाला, ऐसे झगड़े सुलझाने वाला जो दूसरे नहीं सुलझा पाते। अटकने पर ग़ायब हो जाना — रिश्ते में, अपनी ही ज़िंदगी में, पृष्ठभूमि बन जाना। तनाव-रेखा प्रकार 6 की ओर (चिंता, शक, ज़्यादा सोचना), विकास-रेखा प्रकार 3 की ओर (आख़िरकार अपने लक्ष्य के लिए चल पड़ना, ख़ुद को अहम होने देना): प्रकार 9 के लिए “मुझे यह नहीं चाहिए” कहने का क्षण ही सच में अपने शरीर में लौटना है।