प्रकार 6 जिससे बचना चाहता है वह है “न सहारा, न दिशा, मैं अकेले नहीं सँभाल पाऊँगा”, और भरपाई की रणनीति है पहले से हर संभावित गड़बड़ सोच लेना — भरोसे लायक़ अधिकार, व्यवस्था या समूह ढूँढना, और साथ ही उस पर शक करना। यह मस्तिष्क केंद्र का बीच वाला प्रकार है, जहाँ डर सबसे सीधा है: प्रकार 5 भीतर सिमटता है, प्रकार 7 बाहर भागता है, प्रकार 6 अपनी जगह खड़ा होकर जाँचता है।
इस क्रिया की सबसे दिलचस्प बात है वफ़ादारी और शक का साथ होना: प्रकार 6 को किसी चीज़ पर भरोसा चाहिए, और बहुत चाहिए इसलिए पूरा भरोसा करने से डरता है — तो परखता है, सवाल करता है, छेद ढूँढता है। यह विरोधाभास नहीं, एक ही डर के दो पहलू हैं। परंपरा “डर वाला” और “डर-विरोधी” रूप भी अलग करती है: एक ख़तरे से बचता है, एक उसकी ओर दौड़ता है, दोनों एक ही चीज़ से निपट रहे हैं।
आप इसे कहाँ पहचानेंगे: पहले सबसे बुरा सोचना, वादों की परवाह और धोखे का डर, अधिकार पर निर्भरता और विद्रोह एक साथ, प्लान B हर समय तैयार। सहज समय में प्रकार 6 सबसे भरोसेमंद साथी है: वफ़ादार, ज़िम्मेदार, टीम को आगे रखने वाला, संकट में सबसे शांत। अटकने पर चिंता कमान ले लेती है — हर चीज़ पर शक, कुछ भी करने से डर, डर को दूसरों पर डालना। तनाव-रेखा प्रकार 3 की ओर (अभिनय, सब ठीक होने का दिखावा), विकास-रेखा प्रकार 9 की ओर (आख़िरकार चौकसी छोड़ना, भरोसा कि सब ठीक होगा): प्रकार 6 के लिए सुरक्षा कभी बाहर नहीं थी — वह उस पल में है जब आप देखते हैं कि आप पार निकल आए।