जो बहुत सहज हो, उसका एहसास कम होता है क्योंकि उसमें मेहनत नहीं लगती। आप उसकी क़द्र नहीं करते, ऐसा नहीं; वह बस बहुत शांत है। याद रखिए कि वह है।
त्रिकोण: दो ग्रह एक-दूसरे के साथ बहते हैं, काम में ज़्यादा ज़ोर नहीं लगता।
जो बहुत सहज हो, उसका एहसास कम होता है क्योंकि उसमें मेहनत नहीं लगती। आप उसकी क़द्र नहीं करते, ऐसा नहीं; वह बस बहुत शांत है। याद रखिए कि वह है।
इसे अक्सर “भाग्यशाली दृष्टि” कहा जाता है। सहज होना उपयोगी होना नहीं है। जहाँ रुकावट नहीं, वहाँ घर्षण भी नहीं जो उसकी याद दिलाए; इसलिए बहुत सहज प्रतिभा अक्सर उम्र भर “आता तो था, पर कभी शिखर तक नहीं गया” पर ठहरी रहती है।